लखनऊ, अगस्त 4 -- बारिश की मंद-मंद बौछारे और दिलों को छूने वाले कलामों के साथ कवि सम्मेलन और मुशायरे की शमां रोशन रही। एक साथ फाउंडेशन की ओर से गोमती नगर स्थित होटल में हुए मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। अपने गीतों, गजलों से एक अलग पहचान बनाने वाले लोकप्रिय साहित्यकार आलोक श्रीवास्तव ये सोचना गलत है कि तुम पर नजर नहीं मसरूफ हम बहुत हैं मगर बेखबर नहीं सुनने वालों की दाद हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने मंजिले क्या हैं रस्ता क्या है हौसला हो तो फासला क्या है कलाम को पढ़कर महफिल अपने नाम की। दिल्ली से आयीं नमिता नमन ने हम मुकम्मल ना कर सके जिसको , ढाई अक्षर की वो कहानी थी, रीवा से आए सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने जिस घर में दो पीढ़ी जी देश के लिए , मैं उसी खून से पैदा हुआ इंकलाब हूं, मोईन अल्वी ख़ैराबादी ने तुम्हारे वस्ल की किरनें ...
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