नई दिल्ली, नवम्बर 3 -- सुप्रीम कोर्ट ने दलित समुदाय के एक व्यक्ति को गाली देने के आरोपों का सामना कर रहे शख्स को अंतरिम जमानत देते हुए कहा है कि किसी भी दलित समुदाय के व्यक्ति को 'हरामी' (Bastard) कहना जाति सूचक गाली नहीं है। हरामी कहने के आरोप पर उस शख्स के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। सिद्धार्थन बनाम केरल राज्य एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि यह काफी आश्चर्यजनक है कि पुलिस ने याचिकाकर्ता के खिलाफ "हरामी" शब्द का इस्तेमाल करने के लिए एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया, जबकि यह शब्द जाति-आधारित गाली नहीं है। शीर्ष अदालत ने हाल ही में मारपीट और जाति-आधारित दुर्व्यवहार के आरोपी 55 वर्षीय व्यक्ति को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि FIR में जातिवादी टिप्पणी का...