लखनऊ, फरवरी 5 -- उत्तर प्रदेश में इंसानों के अचानक गायब होने की बढ़ती घटनाएं अब न्यायपालिका के रडार पर हैं। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में राज्य से एक लाख से अधिक लोग लापता हुए हैं, लेकिन बरामदगी का आंकड़ा दस हजार तक भी नहीं पहुँच सका है। कोर्ट ने इस स्थिति को 'बेहद चिंताजनक और गंभीर' करार देते हुए इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है।कैसे सामने आया आंकड़ों का 'डरावना' सच? यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ लखनऊ के चिनहट निवासी विक्रमा प्रसाद की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याची ने कोर्ट को बताया कि उसका बेटा जुलाई 2024 से लापता है। चिनहट थाने...