नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी गोहत्या अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पुलिस द्वारा लापरवाह तरीके से केस दर्ज करने पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके साथ राज्य में गौ रक्षकों की बढ़ती समस्या को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने यूपी डीजीपी और प्रमुख सचिव (गृह) को तीन सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामे दायर करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि अधिनियम 1955 के प्रावधानों के अधीन ना होने के बावजूद ऐसी फिर क्यों दर्ज की जा रही है? कोर्ट ने राहुल यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। राहुल ने प्रतापगढ़ में गो हत्या अधिनियम की धारा 3,5 ए और 8 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकता को रद्द करने की मांग की। यह भी पढ़ें- टीईटी मुद्दा : जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल...
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