बरेली, अगस्त 31 -- धार्मिक आयोजनों में बढ़ते दिखावे और शोरगुल को लेकर यूपी के बरेली शहर से बड़ा संदेश सामने आया है। बरेलवी मसलक से जुड़े जाने-माने उलेमा मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने शरीयत के हवाले से कहा है कि मजहबी जुलूसों में डीजे, बैंडबाजे और नाच-गाने की इजाजत नहीं है। मौलाना ने इस तरह की गतिविधियों को शरीयत के खिलाफ करार देते हुए मुस्लिम नौजवानों को इससे परहेज करने की नसीहत दी है। मौलाना शहाबुद्दीन का कहना है कि ईद मिलादुन्नबी, उर्स और अन्य मजहबी जुलूस इबादत का जरिया हैं न कि मनोरंजन या दिखावे का। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने सादगी, अदब और इबादत को अहमियत दी है। लिहाजा जुलूसों में शोरगुल, धूमधड़ाका और डीजे बजाना इस्लामी तालीम के खिलाफ है। पैगंबर ए इस्लाम की शान में निकलने वाले जुलूसों की पहचान इबादत और अदब से होनी चाहिए न कि बैंडबाजे और डां...
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