नैनीताल, नवम्बर 26 -- आरक्षण को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला दिया। अपने निर्णय में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दूसरे राज्य की अनुसूचित जाति की ऐसी महिला, जो शादी के बाद उत्तराखंड में बसी हो, उसे यहां की सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने अंशु सागर समेत कई अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। एकलपीठ ने माना, 'आरक्षण का अधिकार क्षेत्र विशिष्ट होता है और यह प्रवास के साथ स्थानांतरित नहीं होता।' याचिकाकर्ता अंशु सागर मूल रूप से यूपी के मुरादाबाद की निवासी थीं। उन की शादी उत्तराखंड में एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति से हुई। अंशु जन्म से 'जाटव' समुदाय से हैं, जो यूपी में अनुसूचित जाति है। विवाह के बाद उन्होंने उत्तराखंड के जसपुर में जाति प्रमाणपत्र और स्थायी निव...