नई दिल्ली, अगस्त 19 -- सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल की मुस्लिम लड़की की शादी को सही ठहराया है। साथ ही उसे और उसके 30 वर्षीय पति को संरक्षण दिए जाने के हाई कोर्ट के फैसले को भी बरकरार रखा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को भी फटकार लगाई है। आयोग ने इस लड़की की उम्र का हवाला देते हुए शादी पर सवाल उठाया था और इसे पॉस्को का उल्लंघन बताया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि अगर लड़की 15 साल की उम्र पार कर चुकी है तो मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक वह मनपसंद व्यक्ति से शादी कर सकती है। इससे बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉस्को) के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं होता। हाई कोर्ट ने आशियाना, उसके पति जावेद और उसके बच्चे को सुरक्षा दी थी ताकि पारिवारिक सदस्यों समेत ...
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