सहारनपुर, सितम्बर 24 -- दिल्ली रोड स्थित रीजेंसी अपार्टमेंट में चल रही श्रीरामकथा के दौरान व्यासपीठ से आचार्य ज्ञानचंद्र द्विवेदी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने शिव-पार्वती विवाह की कथा का वर्णन करते हुए कहा है कि जो स्त्री-पुरुष इस कथा को गाते या कहते हैं, वे विवाह जैसे मंगल कार्यों में सदा सुख पाते हैं। कथा के अनुसार जब सभी देवता अपने-अपने वाहन और श्रृंगार के साथ विवाह की तैयारी कर रहे थे, तब शिवजी का श्रृंगार भूत-प्रेत और गणों ने किया। उनके गहने सांप, वस्त्र बाघम्बर, अंग पर भस्म, गले में विष और मस्तक पर चन्द्रमा एवं गंगा का वास था। उनका रूप साधारण नहीं, बल्कि भयावह प्रतीत हो रहा था। शिवजी की बारात में तरह-तरह के भूत-प्रेत, राक्षस और विचित्र वेषधारी गण सम्मिलित हुए। इस असामान्य बारात को देखकर नगर में कौतूहल और भय फैल गया। लोग कहने लगे क...
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