शैलेन्द्र सेमवाल। देहरादून, जनवरी 9 -- हिमालय को अब तक स्वच्छ जल का सबसे भरोसेमंद स्रोत माना जाता रहा है, लेकिन एक ताजा वैज्ञानिक अध्ययन ने इस धारणा को तोड़ दिया है। शोध में खुलासा हुआ कि खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक हिमालयी जलस्रोत तक पहुंच गए हैं।यमुनोत्री के पास माइक्रोप्लास्टिक कण यमुनोत्री ग्लेशियर के समीप उद्गम स्थल पर भी माइक्रोप्लास्टिक कणों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो हिमालयी पर्यावरण के लिए गंभीर चेतावनी है। यमुना में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण ग्लेशियर से लेकर निचले हिमालय की तलहटी तक फैल चुका है। पर्वतारोही, ट्रैकर, तीर्थ यात्रियों के द्वारा प्रयोग किए जाने वाले जूते, कपड़े, प्लास्टिक उत्पाद और मानसूनी हवाओं के कारण माइक्रो डस्ट पार्टिकल हिमालय को प्रभावित कर रहे हैं। शोधकर्ताओं ने यमुना के 170 किलोमीटर लंबे हिमालयी हिस्से का अध्ययन...