समस्तीपुर, मई 7 -- समस्तीपुर, हिन्दुस्तान टीम। शहर के मोहनपुर निवासी 90 वर्षीय बुजुर्ग जीतन राय ने बताया कि 1971 में आखिरी बार मॉकड्रील हुई थी। उतना तो अब नहीं याद है लेकिन उस समय रिक्शा से प्रचार किया जाता था। लोगों से घरों में रहने की अपील की जाती थी। शाम होते ही मोमबत्तियां या डिबिया को बुझा देने की सख्त हिदायत थी। अंधेरा ढलने से पहले ही हमलोग खाना बनाकर खा पी लेते थे और किसी अनहोनी की आशंका को लेकर घर के आदमी हमेशा जगे रहते थे। टोला में ही एक बड़ा सा गड्डा भी किया गया था, जिसे आपात स्थिति में बंकर के तौर पर उपयोग करना था। हालांकि उस गड्डे को उपयोग करने की नौबत नहीं आयी। अगर बीड़ी भी पी तो उसकी रोशनी से भी बम गिर सकता था, ऐसा डर बना हुआ था। किसी भी प्रकार की रौशनी नहीं करने की हिदायतें लगातार रेडियो और अखबारों के माध्यम से दी जाती थी। गर...
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