नई दिल्ली, दिसम्बर 31 -- एक नए अध्ययन के अनुसार, दिल्ली मेट्रो से यात्रा करने वाले लोगों पर प्रदूषण (PM2.5 कणों) का असर सबसे कम होता है, जबकि ऑटो-रिक्शा में सफर करने वाले लोग सबसे अधिक प्रदूषण की चपेट में आते हैं। यह शोध 'वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI)' और 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट एंड रिसर्च' के शोधकर्ताओं ने किया है। 'डिस्कवर एटमॉस्फियर' जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में दिल्ली मेट्रो की 'मैजेंटा लाइन' के 10.46 किलोमीटर लंबे रास्ते पर पीक ऑवर्स (भीड़भाड़ वाले समय) के दौरान प्रदूषण के स्तर को मापा गया। शोध में पाया गया कि मेट्रो कोच के अंदर PM2.5 का औसत स्तर 34.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। यह भारत में सुरक्षित मानी जाने वाली सीमा (60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) से काफ...