नई दिल्ली, अक्टूबर 26 -- कई बार हम लाइफ के ऐसे दौर से गुजर रहे होते हैं। जहां पर हमें किसी के भावनात्मक सपोर्ट की जरूरत होती है। ऐसा इंसान जो सही-गलत में फर्क बता सके और आगे का सही रास्ता दिखा सके। क्योंकि अक्सर इंसान को लगता है कि जो वो सोच रहा बस वहीं सही है लेकिन आपस में मिलजुल कर रहने और सुख-शांति के लिए दूसरों के सोच, मत और विचारों को समझने की भी जरूरत होती है। मन में उठ रही ऐसी ही उधेड़बुन और उलझनों को समझने के लिए मनोविशेषज्ञ कुछ लोगों के सवालों के जवाब दे रहे हैं। मेरी उम्र 48 साल है और मैं प्री-मेनोपॉज की अवस्था से गुजर रही हूं। पिछले कुछ समय से मुझे बहुत ज्यादा मूड स्विंग होने लगा है, जिससे मैं खुद भी परेशान हो जाती हूं। कैसे उबरूं? -निकिता दुबे, लखनऊ प्री-मेनोपॉज सभी महिलाओं की जिंदगी में अमूमन इसी उम्र के आसपास आता है। आपके सा...
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