मधुबनी, जनवरी 22 -- मधुबनी, निज संवाददाता। मिथिलांचल की धरती पर जज़्बे और जिजीविषा की एक सशक्त कहानी को साकार कर रह रही है, रांटी की दिव्यांग ज्योति कुमारी। ज्योति कुमारी बोल और सुन नहीं पातीं, लेकिन उनकी उंगलियां रंगों में ऐसे भाव भरती हैं, जो दिल तक पहुंच जाते हैं। मुख-बधिर होने के बावजूद ज्योति ने हार नहीं मानी, बल्कि अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बना लिया। ज्योति के पिता लालदेव कामत बताते हैं कि करीब पांच साल की उम्र में उनकी बेटी को अचानक सुनने और बोलने में परेशानी होने लगी। इलाज कराया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो सका। धीरे-धीरे ज्योति पूरी तरह मुख-बधिर हो गई। शुरुआत में वह गुमसुम रहने लगी, खुद में सिमट गई। परिवार के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उम्मीद की लौ बुझने नहीं दी गई। करीब दस वर्ष की उम्र में ज्योति का मन मिथिला पेंटिंग...