मुजफ्फरपुर, मार्च 7 -- मुजफ्फरपुर। रेलवे की रीढ़ कहे जाने वाले रनिंग स्टाफ चुनौतियों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं। मुसाफिरों को मंजिल तक पहंचाने वालों का अपना ही ठौर नहीं। मुजफ्फरपुर में पदस्थापित 500 से अधिक रनिंग स्टाफ (गार्ड, लोको पायलट) में से महज सात को क्वार्टर आवंटित है। पटरियों पर दौड़ती रेल के साथ भागदौड़ भरी जिंदगी में इन्हें आराम मयस्सर नहीं। इनका कहना है कि नौ घंटे से ज्यादा काम, लगातार दो रातों से अधिक की ड्यूटी के बावजूद प्रताड़ित हो रहे हैं। ट्रेन इंजन में शौचालय नहीं होने से सेहत पर असर पड़ रहा है। रेलवे को हमारे हित में पहल करनी चाहिए। रेलगाड़ियों के परिचालन में रनिंग स्टाफ की भूमिका सबसे अहम होती है, लेकिन यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने वाले कई कठिनाइयों से गुजर रहे हैं। इनका कहना है कि विभाग भत्ता में कटौती करता जा रहा ...
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