लखनऊ।, दिसम्बर 19 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहना है कि नारा 'गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा' न केवल भारतीय कानून की सत्ता को चुनौती देता है, बल्कि यह देश की संप्रभुता और अखंडता के भी खिलाफ है। कोर्ट ने माना कि ऐसे नारे लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाते हैं और इसलिए दंडनीय हैं। अदालत में इस दौरान विभिन्न धर्मों के नारों का उल्लेख किया, जिसमें 'जय श्रीराम' और 'हर-हर महादेव' का भी जिक्र हुआ। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 'सर तन से जुदा' जैसा नारा भारतीय न्याय प्रणाली को चुनौती देता है, जो संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। अदालत के अनुसार, यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, जो देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यो...
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