बदायूं, सितम्बर 17 -- गुलजारे सुखन साहित्यिक संस्था की ओर से शहर के मोहल्ला सोथा फरशोरी मंजिल पर मुशायरे का आयोजन किया गया। कौमी एकता को समर्पित मुशायरे में शायरों ने बेहतरीन कलाम पेश कर समां बांध दिया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. दानिश बदायूंनी ने नात ए पाक और कुमार आशीष ने सरस्वती वंदना पढ़कर की। कुमार आशीष ने मधुर स्वर में गजल सुनाई, जो इश्को उल्फत में मुब्तिला है, फकत मुहब्बत है उनका ईमां। न वो ये जानें कि दीन क्या है, हराम क्या है हलाल क्या है। डॉ. दानिश बदायूंनी ने नाते रसूल पढ़ने के बाद गजल सुनाई, मयकदे में रिंद सारे देखते रह जाएंगे, जब उठाकर जाम कोई पारसा ले जाएगा। शायर सुरेंद्र नाज बदायूंनी ने जज्बात का इजहार यूं किया, अगर बेइल्म हो तो डिग्रियां कागज के टुकड़े हैं, अगर हैं डिग्रियां तो ज्ञान भी होना जरूरी है। सादिक अलापुरी, समर बदायूंन...
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