फरीदाबाद, जनवरी 31 -- फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले के थीम राज्य उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी कला की चमक बिखेरने वाले ब्रास मेटल शिल्पी दिलशाद हुसैन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पीतल (ब्रास) पर की गई बारीक नक्काशी और पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक स्वरूप देने वाले दिलशाद हुसैन ने न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी भारतीय शिल्पकला का नाम रोशन कर चुके हैं। उनकी कला यात्रा संघर्ष, धैर्य और निरंतर अभ्यास की मिसाल है, जिसने उन्हें वर्ष 2023 में पद्मश्री सम्मान तक पहुंचाया। दिलशाद हुसैन का जन्म उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हुआ, जो पहले से ही पीतल उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने महज 10 वर्ष की आयु में अपने दादा अब्दुल हमीद से ब्रास मेटल पर काम करने की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं। शुरुआत...
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