आचार्य विद्यासागर, जनवरी 14 -- भोगभूमि का अवसान हो रहा था और कर्मभूमि का प्रारंभ। उसी समय बालक ऋषभ का जन्म अयोध्या में हुआ। उनके पिता राजा नाभिराय एवं माता रानी मरूदेवी थीं। पहले भोगभूमि में भोग सामग्री कल्पवृक्षों से मिलती थी। कर्मभूमि प्रारंभ होते ही कल्पवृक्षों ने भोग सामग्री देना बंद कर दिया था, जिससे जनता में त्राहि-त्राहि मच गई। सारे मानव इस समस्या को लेकर राजा नाभिराय के पास पहुंचे। राजा नाभिराय ने कहा इसका समाधान अवधिज्ञानी राजकुमार ऋषभदेव करेंगे। राजकुमार ऋषभदेव ने दुखी जनता को देखकर आजीविका चलाने के लिए षट्कर्म का उपदेश दिया। ये हैं- असि, मसि, कृषि, विद्या, शिल्प, वाणिज्य। कुछ समय के पश्चात पिता ने समय देखकर राजकुमार ऋषभदेव का राजतिलक कर दिया। एक समय राजा ऋषभदेव अपने राजदरबार में स्वर्ग की अप्सरा नीलांजना का नृत्य देख रहे थे कि ...