अमरोहा, मार्च 24 -- रमजान के तीसरे और आखिरी अशरे में अल्लाह की रहमतें खूब बरस रही हैं। रोजेदार सुबह से लेकर देर रात तक इबादत करने में मशगूल हैं। वहीं, शब-ए-कद्र की रातों में मस्जिदों में भी इबादत का सिलसिला चल रहा है। रविवार को 22 वां रोजा भी मुकम्मल हो गया। 23 वीं शब के चलते इफ्तार के बाद मगरिब की नमाज पढ़ते ही मस्जिदों में शब-ए-कद्र की रौनक दिखाई देने लगी। तरावीह की नमाज के बाद लोगों ने अल्लाह की रजा हासिल करने के लिए नफिल नमाज, तस्बीहात और कुरआन की तिलावत की। कई मस्जिदों में रोजेदारों के लिए खास तरीके से सहरी का इंताजाम भी किया गया था। मुफ्ती तैय्यब कादरी नईमी ने बताया कि शब-ए-कद्र की रात में की जाने वाली इबादतों का खास मकाम है। इसका ताल्लुक सीधे अल्लाह से है। आखिरी अशरे की इन्हीं ताक रातों में से किसी एक रात में कुरआन ए करीम नाजिल हुआ...
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