अमरोहा, फरवरी 21 -- मुकद्दस रमजान के महीने में अल्लाह की रहमतें बरस रही हैं। रोजा व नमाज की पाबंदी के साथ रोजेदार सिर्फ अल्लाह की बारगाह में लौ लगाए हुए है। रोजेदारों का ज्यादातर वक्त इबादत और गुनाहों से माफी मांगने में गुजर रहा है क्योंकि रमजान के महीने में फरिश्ते अल्लाह की रहमतों के दरवाजे पूरी तरह खोल देते हैं। जिसके चलते रोजेदारों पर खूब नेकियां बरस रही हैं। मुफ्ती तैय्यब अहमद कादरी नईमी बताते हैं कि रमजान के मुकद्दस माह का हर लम्हा अपनी खास अहमियत रखता है। इसमें इबादत का सवाब भी 70 गुना बढ़ जाता है। नफिल नमाज का सवाब फर्ज और फर्ज का सवाब उससे भी कई गुना ज्यादा दिया जाता है। दरअसल, इबादत के लिहाज से रमजान माह को तीन अशरों में बांटा गया है। हर अशरा दस-दस दिन का है। पहला अशरा रहमत का है। इसमें अल्लाह की खास रहमतें रोजेदारों पर बरसाती है...
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