मुंगेर, जनवरी 9 -- मुंगेर, एक संवाददाता। कभी ग्रामीण मुंगेर की जीवनरेखा मानी जाने वाली अधिकांश स्थानीय छोटी-बड़ी नदियां, आहार, पईन और नाले आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिन जलस्रोतों में पशु नहाते थे और अपनी प्यास बुझाते थे, वहां अब रेत और सूखी मिट्टी नजर आती है। गिरते भूगर्भ जलस्तर और लगातार कमजोर होते जलस्रोतों ने ग्रामीण इलाकों में जल संकट को और गहरा कर दिया है। इसका असर पशुपालकों पर भी पड़ रहा है, जिनकी आजीविका सीधे पशुओं पर निर्भर है। जिले के विभिन्न प्रखंडों के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों से हुई बातचीत में यह सामने आया कि, पहले पशुओं के लिए पीने एवं उसे स्नान करने के लिए पानी की अलग से व्यवस्था नहीं करनी पड़ती थी। विशेष रूप से पशु को चराने के समय स्थानीय नदी आहार, पईन, तालाब आदि ही उनकी जरूरतें पूरी कर देते थे। अब अ...
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