चंदौली, दिसम्बर 27 -- धानापुर, हिन्दुस्तान संवाद। धानापुर कस्बा स्थित थाना चौराहा पर शनिवार को अदनान फाउण्डेशन के तत्वावधान में उर्दू शायर मिर्जा गालिब की जयंती साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने गालिब की शायरी, उनकी गहरी सोच और अद्वितीय साहित्यिक विरासत पर अपने विचार साझा किए। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए एम अफसर खान सागर ने कहा कि मिर्जा गालिब की शायरी इंसान के भीतर छुपे दर्द, अनुभव और सच्चाइयों की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने गालिब का मशहूर शेर "हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।" पढ़ते हुए कहा कि यह शेर आज के दौर में भी इंसानी अधूरी चाहतों और जीवन संघर्ष का आईना है। रामशरण यादव गुड्डू ने अपने संबोधन में कहा कि गालिब की रचनाएं केवल इश्क तक...
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