दरभंगा, सितम्बर 15 -- दरभंगा। महारानी अधिरानी रमेश्वरलता संस्कृत कॉलेज में रविवार को द्वादश व्याख्यानमाला के तहत भारतीय दर्शनक विकास में मिथिलाक योगदान विषयक 11वां व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान देते हुए मिथिला विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अमरनाथ झा ने भारतीय दर्शन में मैथिल दर्शन की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए कहा कि मिथिला का संपूर्ण दर्शन ही भारतीय दर्शन का सारतत्व है। प्रो. झा ने कहा कि बृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद के अन्तर्गत यह संदर्भित है कि भौतिक विषयों की अपेक्षा आत्म तत्त्व को जानने की इच्छा प्रबल करनी चाहिए। नश्वर वस्तु की बजाय अमरत्व प्रदान करने वाली आत्मा की विवेचना अधिक होनी चाहिए, अर्थात व्यक्ति को बतौर जीवट, आत्मा को केंद्रीय विषयवस्तु मानकर जीवन की साधना करते रहन...
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