पीलीभीत, अक्टूबर 14 -- मिट्टी गूंथकर घड़ा आदि बर्तन बनाने वाले अब कुम्हारों के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मिट्टी के बर्तनों की जगह प्लास्टिक व कागज की प्लेट, कप, गिलास आदि डिस्पोजल की खरीददारी बढ़ने से कुम्हारों के सामने परिवार की जीविका चलाने का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि दीपावली आते ही चॉक घूमने लगते हैं और कुछ मायूसी टूटती है। सदियों से मिट्टी के बर्तनों की एक अलग पहचान रही है। गर्मी के समय में मिट्टी के घड़े में लोग पानी भरते हैं। क्योंकि घड़े का पानी शुद्ध व ठंडा रहता है। वर्ष भर कुम्हार घड़े बनाते हैं ताकि गर्मी में उनके घड़े बिक सके और परिवार की जीविका चल सके। पूरे वर्ष भर कुम्हारों ने मिट्टी को इकट्ठा किया और गूंथकर मिट्टी के घड़े, कुल्हड़ आदि बर्तन बनाकर तैयार किए। ताकि जब शादियां होती हैं तो उस समय कुल्हड़ों की आवश्यकता पड़त...
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