कटिहार, अक्टूबर 18 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि दीपावली का पर्व रोशनी, उल्लास और रिश्तों को जोड़ने का पर्व है। लेकिन इसी रोशनी के बीच एक परंपरा धीरे-धीरे अंधेरे में गुम होती जा रही है । वह है मिट्टी का घरौंदा बनाना। कभी दीपावली से पहले बच्चे मिट्टी से छोटे-छोटे घर बनाकर उन्हें रंगते, सजाते और दीपों से जगमग करते थे। पर आज यह दृश्य लगभग गायब हो गया है। कभी गांव और कस्बों में बच्चे अपने माता-पिता व दादी-नानी की मदद से आंगन में घरौंदा बनाते थे। तुलसी चौरा, छोटी सी सीढ़ी, रंगीन दीवारें और मिट्टी की महक दीपावली के असली उत्सव का हिस्सा होती थीं। माना जाता था कि देवी लक्ष्मी स्वच्छ और आत्मीय घर में ही प्रवेश करती हैं, इसलिए मिट्टी का घरौंदा उनके स्वागत का प्रतीक था। मिट्टी में समाती जा रही है यह परंपरा लेकिन अब यह परंपरा मिट्टी में समाती जा रही...
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