लोहरदगा, दिसम्बर 4 -- लोहरदगा, संवाददाता। मिटटी की सेहत और उर्वरा शक्ति का संरक्षण करना कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ दशकों में रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग ने मिटटी की गुणवत्ता को काफी नुकसान पहुंचाया। मगर कुछ सालों से किसानों में जागरूकता का स्तर बढ़ा है। इसके सुखद परिणाम देखने को मिल रहे हैं। जैविक खाद का उपयोग बढ़ने का नतीजा है कि खेतों में सूक्ष्म जीवों और मछलियों की वापसी हुई है, जो लगभग विलुप्त हो गए थे। इस बार बारिश में धान के खेतों में भारी मात्रा में मछलियों का पाया जाना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण रहा कि मिटटी की सेहत सुधर रही है। प्रत्येक वर्ष 05 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मिट्टी के महत्व, खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन पर इसके प्रभाव को किसानों को समझाना है। मिट्टी की गुणवत्ता का...