नवादा, जनवरी 28 -- नवादा। राजेश मंझवेकर पुश्तैनी धंधे से लगाव पर नए जमाने के साथ कदमताल कर पाने का अभाव कुम्हार समुदाय के लिए हर रोज नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। कुम्हार समुदाय का संघर्ष पुराना है लेकिन वर्तमान के दौर में यह चुनौतियों और भी भारी पड़ रही हैं। मिट्टी की कमी और उचित संसाधनों के अभाव में उनकी परम्परागत कला दम तोड़ती जा रही है। पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन, दीये और कुल्हड़ तथा सीजन में मूर्तियां बनाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे कुम्हार वर्तमान में अपने पुश्तैनी धंधे को बचाने की जद्दोजहद के दौर से गुजर रहे हैं। वे आज मिट्टी की किल्लत और बाजार की कठिनाइयों के कारण अपने इस पुश्तैनी धंधे को छोड़ने को बाध्य हैं। शहर के गोंदापुर स्थित मोहल्ले में बसे कुम्हार समाज की सादगी और उनकी परंपरागत कला आज संघर्ष के दौर से गुजर रही है। सदि...
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