भागलपुर, अक्टूबर 11 -- भागलपुर, कार्यालय संवाददाता। रेल ट्रैक के आसपास के क्षेत्र में बेसहारा जानवर अक्सर ही ट्रेन से टकरा जाते हैं। जानवर के अवशेष व मांस पहियों में फंस जाने से ट्रेन रुक जाती है या अन्य किसी कारणों से भी ट्रेन रुक जाती है। ट्रेन के पुन: रवाना होने तक जितना समय लगता है, रेलवे को 20 हजार रुपये प्रति मिनट की क्षति होती है। इस समस्या से बचने के लिए अब मालदा से किऊल तक ट्रैक के किनारे कंटीली तारों से घेराबंदी की जायेगी। इसके लिए वर्क एवार्ड कर दिया गया है। नवंबर से यह काम शुरू हो जायेगा। अभी इस तरह की घेराबंदी का काम कई रेलखंड के बीच चल रहा है। कंटीली तारों से घेराबंदी होने से जानवरों के एकाएक ट्रैक पर आ जाने की स्थिति नहीं होगी। साथ ही ट्रेनों के चालक निश्चिंत होकर ट्रेनों को चला सकेंगे। ट्रेन के खड़े होने पर डीजल और बिजली ख...
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