मुरादाबाद, दिसम्बर 8 -- कुमार कार्तिकेय भवन में चल रही सात दिवसीय श्री राम कथा के अंतिम दिन कथा व्यास पंडित बृजेश पाठक ने कहा बालक के निर्माण में माता का बहुत बड़ा हाथ होता है, वह अपने बालक को जैसा चाहे वैसा बन सकती है क्योंकि मां बालक की प्रथम गुरु होती है। मां की गोद बालक की प्रथम पाठशाला होती है,जहां बालक पहली बार बोलना सीखता है। मां का कर्तव्य है वह अपने बालक को शुभ संस्कार दे,भगवान की ओर प्रेरित करें। हमारे इतिहास में ऐसी माताएं हुई है। जिन्होंने अपने मातृत्व की रक्षा की है ,भक्त ध्रुव की माता सुनीति,चैतन्य महाप्रभु की माता शची लक्ष्मण की माता सुमित्रा यह ऐसी माताएं हैं जिन्होंने अपने बालकों को सद शिक्षा देकर भगवान की सेवा में समर्पित कर दिया। माता सुमित्रा ने लक्ष्मण से कहा श्री राम की सेवा कम पुण्यवान को प्राप्त नहीं होती है ,तुम ब...
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