फतेहपुर, जनवरी 15 -- फतेहपुर। दोआबा में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चले विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण(एसआईआर) अभियान के बाद चौंकाने वाले और दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जिले के लाखों युवाओं और नए मतदाताओं के लिए उनके माता-पिता और दादा-दादी, नाना-नानी न केवल उनके मार्गदर्शक हैं, बल्कि उनके 'मताधिकार' के रक्षक भी बने हैं। 2003 से अब तक के मिलान में जिले के आधे से अधिक मतदाताओं ने अपने परिवार की विरासत के सहारे मतदाता सूची में जगह बनाई है। जिले में कुल 14,82,766 मतदाताओं का ही 2003 के वोटर लिस्ट से सही मिलान हो सका है, जिसमें से अधिकांश मतदाताओं ने एसआईआर का मिलान में अपने माता-पिता या दादा-दादी, नाना-नानी के ब्योरों का सहारा लिया है। यह दर्शाता है कि अपनी पहचान स्थापित करने के लिए जिले की आधी से ज्यादा ...