बाराबंकी, जनवरी 20 -- बाराबंकी। माता पिता और गुरु होते हैं प्रत्यक्ष देवता उनकी सेवा से बढ़कर पूजा-पाठ सब व्यर्थ है। उक्त विचार चित्रकूट धाम से पधारे सुबोध कांत ने दशहरा बाग स्थित रामलीला मैदान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भाभगवत कथा के पांचवें दिन कही। श्रीपंत जी ने कथा में गोवर्धन धारण की कथा सुनाते हुए बताया गया कि श्री कृष्ण ने इंद्र जी पूजा बन्द करा कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा कराई। इस लीला के माध्यम से भगवान ने प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा दिया। हमारे पर्वत, नदियां व जंगल सुरक्षित रहे। साथ ही पूतना वध की कथा सुनाई गई। जिसमें भगवान ने अपनी कृपा से पूतना को भी मां का स्थान प्रदान किया। इस मौके पर किरन वर्मा, सन्दीप वर्मा, मुकेश वर्मा, उत्तम वर्मा, रामबरन यादव, विवेक अवस्थी, पंकज वर्मा, सुरेन्द्र सिंह, विमल वर्मा सहित ग्रामीण मौजूद थे।
हिंद...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.