नई दिल्ली, फरवरी 27 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। कड़कड़डूमा अदालत ने शादी का झांसा देकर एक महिला के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी एक सैन्य अधिकारी को बरी कर दिया। सैन्य अधिकारी पर महिला को दो बार गर्भपात के लिए मजबूर करने का भी आरोप था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गजेंद्र सिंह नागर की अदालत ने कहा कि इस तरह के वादे को लंबे समय एवं अनिश्चितकाल तक यौन संबंध बनाने के लिए प्रलोभन नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालयों ने माना है कि शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाने के लिए प्रलोभन देना और पीड़िता का प्रलोभन का शिकार होना, उस समय के संदर्भ में समझ में आने वाली बात हो सकती है, लेकिन शादी का वादा, लंबे और अनिश्चितकाल तक यौन संबंध बनाने के लिए प्रलोभन नहीं माना जा सकता। आरोप बेबुनियाद हैं और संदेह से परे साबित नहीं हुए हैं। महिल...
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