देहरादून, फरवरी 22 -- देहरादून। महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य का प्रोफाइल, जोखिम कारक और लक्षण पुरुषों से बिल्कुल अलग होते हैं। इसलिए चिकित्सा क्षेत्र में यह मान लेना गलत है कि 'महिलाएं छोटे पुरुष हैं'। महिलाओं के हृदय रोगों के सटीक उपचार के लिए जेंडर-विशिष्ट शोध और विशेष दृष्टिकोण की सख्त जरूरत है। यह बात शनिवार को कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के दो दिवसीय 'पिंक काउंसिल 2026' के शुभारंभ पर देश-विदेश से आए हृदय रोग विशेषज्ञों ने कही। विशेषज्ञों ने महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज के प्रति जागरूकता और शीघ्र निदान पर जोर दिया। साथ ही चिकित्सा शोध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि तकनीक और डेटा विश्लेषण से अब बेहतर और सटीक उपचार संभव है। उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ...