सिमडेगा, जुलाई 19 -- सिमडेगा। जिले के किसी भी क्षेत्र में कोई कार्यक्रम हो तो अतिथियों के माथे पर खजुर से बनी मुकुट नजर आती है। यह मुकुट महिलाओं के हुनर से तैयार किया जाता है। खजूर के कोमल पत्तों से बना मुकुट जिले में सम्मान का प्रतीक बन चुका है। जो पूरी तरह से गांव की हुनरमंद महिलाओं के हाथों की देन है। यह शानदार पहल अतिथियों के स्वागत को परंपरा से भी जोड़ती है। इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 2016 में जेएसएलपीएस के जिले में जमीनी स्तर तक प्रभावी क्रियान्वयन के बाद हुई है। संस्था से जुड़ने के बाद महिलाओं के कौशल की पहचान दी गई। विभिन्न प्रशिक्षणों और मुलाक़ातों के दौरान पता चला कि गांव की कई महिलाएं खजूर के कोमल पत्तों को आकर्षक रूप देकर सुंदर मुकुट तैयार करने की कला में निपुण हैं। पहले यह कला केवल महज रो रहे बच्चों को ठगने तक सीमित थी। लेकिन ज...
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