नई दिल्ली, अगस्त 26 -- महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विदर्भ में जुडपी जंगल की लगभग 86,409 हेक्टेयर भूमि को वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के दायरे से बाहर करने और बिना किसी दंड या क्षतिपूर्ति के अतिक्रमणों को नियमित करने का अनुरोध किया है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि यह मांग सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों और राज्य के अपने ही कानूनी ढांचे के उलट है। जुडपी जंगल, जिसका नाम मराठी में झाड़ियों का जंगल कहा जाता है और पूर्वी विदर्भ के नागपुर, वर्धा, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिलों के सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में यह जंगल के रूप में दर्ज झाड़ीदार भूमि है। इस महीने की शुरुआत में दायर महाराष्ट्र सरकार के हलफनामे में कहा गया कि राजस्व अभिलेखों में इन जमीनों को जुडपी वन भूमि के रूप में दर्ज...