कुशीनगर, मई 12 -- कुशीनगर, हिटी। महाराणा प्रताप ने मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया, लेकिन मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने सत्ता व राजसुख को त्याग कर अपनी मातृ भूमि के लिए जंगलों में जीवन यापन किया। घास की रोटियां खाईं, लेकिन अपने स्वामिभान और आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। ये बातें मुख्य अतिथि संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक एडवोकेट अनिल सिंह ने कही। वह महाराणा प्रताप की 485वीं जयंती पर अखिल भारतीय क्षत्रिय चेतना परिषद एवं अखिल भारतीय गहरवार क्षत्रिय महासभा के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को लक्ष्मीपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप क्षत्रिय समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे, उनके आर्दशों को आत्मसात करें। कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज के लोगों ने महाराणा प्रताप के चित्र पर प...
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