समस्तीपुर, दिसम्बर 7 -- समस्तीपुर। चाइनीज सामानों पर प्रतिबंध लगने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर वोकल फॉर लोकल के बाद कुम्हारों के लिए अच्छे दिन तो साबित हुए हैं लेकिन आज भी परंपराओं को जिंदा रखने के लिए उन्हें स्ट्रगल करना पड़ रहा है। सात पीढ़ियों का धंधा छोड़ कर अब कुम्हारों ने अन्य कामों को अपना रोजगार बना लिया है। पहले जहां कुम्हार समाज में 70 प्रतिशत लोग यही कार्य करते थे, अब हालात ऐसे हैं कि केवल 2 ही परिवार यह पारंपरिक काम कर रहे हैं। कुम्हार परंपरा के साधन हैं। परंपरा में रंग भर रहे हैं लेकिन इनका जीवन बदरंग है। सभी अब स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं। विदेशी वस्तुओं को त्यागकर देशी वस्तुओं के उपयोग की अपील हो रही है। इससे उन्हें पूरी तरह तो नहीं लेकिन थोड़ी सी मजबूती जरूर मिली है। कुम्हारों...