ललितपुर, मार्च 28 -- बोले ललितपुर फोटो- 1, 2, 11 कैप्सन- काम करने के लिए जाता कुम्हार का परिवार, चाक चलाने की तैयारी करता वृद्ध ग्रामीण, सड़क किनारे मटके बेचता विक्रेता मशीनी युग में मंद पड़ी चाक की रफ्तार, कमजोर हुआ कारोबार जबरदस्त मेहनत के बावजूद अपेक्षित कीमत नहीं मिलने से छाने लगी घोर हताशा कुम्हार तक नहीं पहुंच रहा सरकारी योजनाओं का लाभ, नहीं मिलती अच्छी मिट्टी कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को बताई समस्या पर नहीं हुआ समाधान ललितपुर/ललितपुर। मिट्टी को विभिन्न प्रकार के आकार देकर अपने परिवार के भरण पोषण का इंतजाम करने वाले कुम्हारों का व्यवसाय बढ़ती आधुनिकता के चलते अब पिछड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ होने बावजूद इनके बनाए मिट्टी के बर्तनों की मांग धीरे-धीरे कम हो गयी है। कभी भारतीय समाज और संस्कृतिक की प्रमुख पहचान रह...
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