पाकुड़, जनवरी 7 -- मशरूम की खेती से बदली जिंदगी, विश्वनाथ हांसदा बने आत्मनिर्भरता की मिसाल पाकुड़, प्रतिनिधि। परंपरागत खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने से किस तरह किसानों की आमदनी बढ़ सकती है, इसका जीवंत उदाहरण पाकुड़िया प्रखंड के ग्राम पत्थरडांगा निवासी विश्वनाथ हांसदा प्रस्तुत कर रहे हैं। विश्वनाथ हांसदा ने बताया कि वे पूर्व में पारंपरिक खेती के सहारे परिवार का भरण- पोषण कर रहे थे। जिससे सीमित आय के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। इसी दौरान उन्हें उद्यान विभाग द्वारा आयोजित मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में भाग लेने का अवसर मिला। प्रशिक्षण उपरांत विभाग द्वारा आवश्यक कीट-स्पॉन उपलब्ध कराए गए, जिसके बाद उन्होंने मशरूम की खेती की शुरुआत की। प्रति माह 12 से 15 हजार रुपए की आमदनी-- मशरूम की खेती से वर्तमान में श्री हांस...