लखनऊ, नवम्बर 29 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता रोगी और तीमारदार कई अस्पतालों में चक्कर लगाने के बाद पीजीआई आते हैं। वे परेशान होते हैं। उनकी मनोदशा ठीक नहीं होती है। रिसेप्शनिस्ट, एमएसडब्लू,पीआरओ व नर्स समेत अन्य कर्मचारी इनसें शांत, संतुलित और भावनात्मक रूप से पेश आएं। संवाद के दौरान गुस्सा होने के बजाए उसकी पूरी बात सुनकर उसे सही और सटीक सलाह दें। ये बातें पीजीआई के सीएमएस डॉ. देवेन्द्र गुप्ता ने शनिवार को संस्थान के डॉ. हरगोबिंद खुराना सभागार में कार्य नैतिकता पर आयोजित कार्यक्रम में रिसेप्शनिस्ट, जूनियर रिसेप्शन ऑफिसर, जनसंपर्क अधिकारी, मेडिकल सोशल वर्कर और नर्सिंग स्टाफ से कहीं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश हर्षवर्धन ने अस्पताल व्यवस्था में गैर-मौखिक संचार की भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा शब्द केवल अपनी अभिव्यक्ति का एक माध्यम हैं। रो...