शामली, नवम्बर 1 -- शहर के जैन धर्मशाला में शनिवार को श्री 108 विव्रत सागर मुनिराज ने मनुष्य जीवन की दुर्लभता, मन की श्रेष्ठता और उसके सदुपयोग से मोक्ष प्राप्ति का संदेश दिया। जैन मुनि ने कहा कि मनुष्य जन्म सभी योनियों में सर्वाेत्तम है, और इसमें प्राप्त मन सबसे अद्भुत साधन है जिसके द्वारा जीव किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकता है। यदि मन का सदुपयोग न किया जाए, तो जीवन दिशाहीन पत्ते की तरह भटकता रहता है। उन्होंने कहा कि आज के युग में लोग इस दुर्लभ जीवन और मन का उपयोग केवल धन, संपत्ति, मोबाइल और सांसारिक सुखों में कर रहे हैं। मनुष्य योनि मिलना दुर्लभ है, परंतु इसकी दुर्लभता को अनुभव करना ही मोक्ष मार्ग की शुरुआत है। मोक्ष की प्राप्ति को उन्होंने ग्रीन कार्ड के समान बताया। उन्होने ने कहा कि केवल मुख से की गई भक्ति नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों मे...
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