खगडि़या, जनवरी 13 -- अलौली। एक प्रतिनिधि मनुष्य अपने कर्म का राजा होता है। घार्मिक बनने के लिए नैतिकवान बनना जरूरी है। जय श्री राम का जाप करने से सदगति नहीं मिलती। मिलती है श्री राम के व्यक्तित्व को जीवन में अनुश्रण कर चलने से। उक्त बातें राम जानकी ठाकुरवाड़ी रामपुर अलौली मं नौ दिवसीय राम कथा अयोजन के अंतिम दिन सोमवार को कथा वाचन करते हुए अयोध्या के आचार्य लक्ष्मण दास ने कहीं। उनहोंने कहा राम पुरुषोतम थे। जिसकी चर्चा करने से मन के अन्दर का द्वेष समाप्त नहीं तो कम जरूर होता है। मानवों के बीच झुठ, चाटुकारिता काफी फल फूल रहा है। वही आचार्य मिथलेश दास शास्_त्री ने बताया कि नौ दिवसी नवाह यज्ञ के अवसर पर राम कथा अयोजन का मुख्य उद्देश्य है कि समाज व परिवार में मनभेद की स्थिति उत्पन्न हो रही है उसका नियंत्रण करना। नवाह यज्ञ में काफी संख्या में महि...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.