हमीरपुर, दिसम्बर 10 -- भरुआ सुमेरपुर, संवाददाता। मनुष्य का कार्य चिंता करना नहीं बल्कि चिंतन करना है। मनुष्य की चिंता ईश्वर को है जब आप चिंतन करेंगे ईश्वर आपकी चिंता अवश्य करेंगे। उक्त उद्गार श्री गायत्री तपोभूमि प्रांगण में चल रही राम कथा के पांचवें दिन पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर आत्मानंद गिरि महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भगवान एवं संतों की चिंतन करना चाहिए। ईश्वर आपकी स्वत: चिंता करेगा उन्होंने कहा कि सुख संपत्ति के लिए चिंतन जरूरी है चिंता नहीं। जाप करने से संताप मिटता है जो मनुष्य जप नहीं करता वह पाप कर रहा है। उन्होंने गंगाजल की महानता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गंगाजल का उपयोग शिव पूजन एवं मरणासन्न व्यक्ति के मुख्य में करना चाहिए अन्य पूजा के लिए यह निषेध है। कथा सुनने के लिए पंडाल खचाखच भरा हुआ था।

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