नई दिल्ली, जून 3 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। उच्च न्यायालय ने वाणिज्यिक विवादों में मुकदमेबाजी से पहले मध्यस्थता में भाग न लेने के लिए दिल्ली नगर निगम पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की पीठ ने कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) एक सार्वजनिक प्राधिकरण है। वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम के उद्देश्य को प्राप्त करने और अदालतों पर बोझ कम करने के लिए मध्यस्थता अधिक जरूरी है। बता दें कि एमसीडी ने उच्च न्यायालय में पक्षों के बीच पूर्व-मुकदमेबाजी मध्यस्थता के मुद्दे पर एक वाणिज्यिक अदालत के 10 दिसंबर, 2024 के फैसले को चुनौती दी थी। इसमें एमसीडी को मध्यस्थता में शामिल ना होने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था और एक लाख का जुर्माना लगाया गया था। पीठ ने कहा कि इस बात का कोई ठोस कारण नहीं...
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