मेरठ, दिसम्बर 5 -- मुंडाली। इस्लामी समाज में मदरसे पावर हाउस के समान है और हमारे संबंध इससे जुड़े हैं जिसके कारण हर घर में रोशनी पहुंचती है। यह विचार गुरुवार को जामिया गुलजारे हुसैनिया अजराड़ा के 106वें वार्षिक जलसे की तीसरी सभा को संबोधित करते हुए दारुल उलूम देवबन्द के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने व्यक्त किए। उन्होंने मदरसों के महत्व पर रोशनी डाली और बताया कि हमें शिक्षा हासिल करनी चाहिए जिससे हम इस्लामी संस्कृति और सभ्यता को अपनाकर अपने जीवन को सफल बना सकें। जामिया के मोहतमिम हकीम मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी ने बताया कि मदरसा इंसान को इंसान बनाने की जगह है। यहां से मानव एकता और भाईचारे का संदेश जाता है। यह जलसा भी हिन्दू-मुस्लिम एकता का लगभग सौ वर्ष से प्रतीक बना हुआ है। उन्होंने मानवता कायम करने पर अधिक जोर दिया। दारुल उलूम नद...