सहरसा, जनवरी 10 -- सहरसा/ श्रुतिकांत। शहर में मुरही की मांग लगातार बढ़ रही है। नाश्ते से लेकर पर्व-त्योहारों तक मुरही अब आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी है। खासकर मकर संक्रांति के नजदीक आते ही इसकी खपत में तेजी देखी जा रही है। बढ़ती मांग का असर यह है कि जहां कुछ वर्ष पहले तक शहर में इक्का - दुक्का मुरही मिल ही मौजूद थे, वहीं अब शहरी क्षेत्र में करीब एक दर्जन मुरही मिल संचालित हो रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिला है, बल्कि दर्जनों लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, कुछ साल पहले तक सहरसा में मुरही की आपूर्ति मुख्य रूप से फारबिसगंज से होती थी। वहां से ट्रकों और छोटे मालवाहक वाहनों के जरिए मुरही मंगाई जाती थी। लंबी दूरी के कारण परिवहन खर्च अधिक पड़ता था, जिससे कीमतें भी ज्यादा रहती थीं और मुर...
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