देहरादून, जुलाई 20 -- उत्तराखंड में इन दिनों कर्मचारी आचरण नियमावली का हल्ला मचा हुआ है। कर्मचारी नाराज हैं, पूछ रहे हैं कि ऐसी नियमावली मंत्री-विधायकों और अफसरों के लिए क्यों नहीं बनाई जा रही है? सीमित वेतनभोगी कर्मचारियों से उनके निजी खर्चे में पांच हजार रुपये तक का भी हिसाब पूछे जाने का औचित्य ही क्या है। अलग-अलग संगठनों से जुड़े कर्मचारी नेताओं ने अपनी बात को 'हिन्दुस्तान' अखबार के साथ 'बोले देहरादून' में साझा किया। उन्होंने साफ कहा कि कर्मचारियों के असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के तुगलकी फरमान बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। देहरादून समेत उत्तराखंड के सभी जिलों से कर्मचारी संगठन इस मुद्दे को लेकर मुखरता से अपनी बात को सरकार और शासन तक पहुंचा रहे हैं। उनका साफ कहना है कि राज्य सरकार को इस तरह के नियम को लाने से पहले कर्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.