नई दिल्ली, जनवरी 23 -- यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अपने बीते दिनों को याद कर इतने ज्यादा भावुक हो गए कि मंच पर ही फफक कर रोने लगे। आंखों से गिरते आंसुओं को भी चाह कर नहीं रोक सके। वाक्का मेरठ में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में हुआ। उन्होंने कहाकि जब भी मैं सड़क पर किसी गरीब को परेशान देखता हूं तो दुखी हो जाता हूं। इस दौरान लखनऊ आने से पहले की दास्तां को सुनाया। बताया कि किस तरह संघर्ष करते हुए यहां तक पहुंचे हैं। ब्रजेश पाठक ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्हें कभी जाड़े के लिए जूते नहीं होते थे तो कभी चप्पल नहीं मिलती थी। बताया कि जब बाबा साहेब को सुना तो उनके अंदर पिता की छवि दिखी, मेरे पिता जी जीवित नहीं थे इसलिए मैंने उन्हें पिता समान माना। खुद को गरीबों का सेवक बताते हुए उ...