औरंगाबाद, जनवरी 14 -- नवीनगर नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या 12 स्थित भवानोंखाप संघत परिसर में गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के छठे दिन कथावाचक अनिल शास्त्री ने मंगल-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इस पावन कथा के श्रवण से विवाह से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में मंगल का संचार होता है। कथावाचक ने बताया कि विदर्भ राज्य के राजा भीष्मक के एक पुत्र रुक्मी और एक पुत्री रुक्मिणी थीं और राजा अपनी पुत्री के लिए योग्य वर की तलाश कर रहे थे। इस विषय की जानकारी उनके मित्र और मगध नरेश जरासंध को भी थी जिन्हें उस समय का शक्तिशाली राजा माना जाता था। अनिल शास्त्री ने कहा कि जरासंध देवी रुक्मिणी को पुत्री समान मानते थे और उनके लिए योग्य वर खोज रहे थे लेकिन दे...