इटावा औरैया, फरवरी 23 -- इटावा। संवाददाता हिन्दू धर्म में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तिथि तक होलाष्टक का समय माना जाता है। होलाष्टक होली दहन से पहले के 8 दिनों को कहा जाता है। इस बार 24 फरवरी मंगलवार से 3 मार्च तक होलाष्टक रहेगा। होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा और 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने के कारण 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी । सूतक या ग्रहण के साए में रंग-गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है । इस संबंध में भागवताचार्य आचार्य किशन स्वरूप दुवे ने बताया कि होलाष्टक लगते ही हिंदू धर्म में सभी शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। क्यों कि इसे अशुभ समय माना जाता है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहते हैं इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह ...